पराली जलाने से बढ़ा प्रदूषण, प्रशासन की सख्ती बेअसर – जिले के 5 गांव खतरे में

गोहाना 
हरियाणा के सोनीपत जिले में एयर क्वालिटी बेहद ख़राब है। इसके बावजूद भी किसान अपने खेतों में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। गोहाना में कृषि विभाग के अधिकारियों ने पराली जलाने के मामले में गोहाना व आस पास के गांव के तीन किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाने के साथ-साथ पर एकड़ के हिसाब से जुर्माना व दो फसलों पर एमएसपी पर रोक लगाई है। 

कृषि विभाग के अधिकारी लगातार गांव गांव जाकर किसानों को पराली न जलाने को लेकर जागरूक भी कर रहे है। सरकार की सख्ती के बावजूद किसान अपने खेतों में पराली में आग लगा रहा है। हालांकि इस साल पिछले सालों की अपेक्षा गोहाना में कम मामले सामने आए हैं। गोहाना में पांच गांवों को येलो जोन में रखा गया है।  

वहीं गोहाना कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के SDO राजेंद्र कुमार ने बताया कि गोहाना क्षेत्र में तकरीबन अस्सी प्रतिशत धान की कटाई हो चुकी है। किसान धान की कटाई के बाद तुरंत नवंबर माह में गेहूं की बिजाई करता है। हमारे क्षेत्र में पचास प्रतिशत गेहूं की बिजाई हो चुकी है। इस बार किसानों द्वारा पराली जलाने के मामले बहुत की कम आए है। हमने पांच गांवों को येलो जॉन पर रखा था। सेटेलाइट के जरिए अब तक पंद्रह लोकेशन मिली है जबकि मौके से तीन ही किसानों के पराली जलाने के केस मिले है। जिनके खिलाफ सरकार के आदेश अनुसार पांच हजार का जुर्माना करते हुए उनकी रेड इंट्री पोर्टल पर कर दी है। यह किसान आगामी दो फसलें सरकारी खरीद MSP पर नहीं बेच पाएंगे। 

कृषि विभाग द्वारा किसानों को पराली नहीं जलाने को लेकर जागरूक किया जा रहा है जिस के चलते पिछले साल की अपेक्षा इस बार किसानों द्वारा अपने धान की कटाई के बाद बचे अवशेष यानी पराली में आग लगाने के बजाय उसका प्रबंधन सही तरीके से किया जा रहा है। सरकार से शख्स आदेश है जो भी किसान अपने खेतो में पराली जलाता मिला उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही के साथ उनकी दो फसलों को भी MSP पर नहीं नहीं खरीदा जाएगा। 

 

#Stubble smoke becomes a concern

Source : Agency

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