नई दिल्ली
उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अत्यंत सख्त और अडिग रुख अपनाते हुए लाल रेखा खींच दी है। किम जोंग उन के देश ने कहा है है कि परमाणु निरस्त्रीकरण को ‘अपरिवर्तनीय रूप से अंतिम रूप दिया गया मामला’ है। देश ने अमेरिका तथा उसके सहयोगी राष्ट्रों द्वारा लगातार की जा रही परमाणु निरस्त्रीकरण की मांगों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के माध्यम से जारी आधिकारिक बयान में उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि दूसरे पक्ष द्वारा उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों को निरस्त्र करने की मांग 'पूरी तरह तर्कहीन चर्चा' और ‘काल्पनिक दिवास्वप्न’ के अलावा कुछ नहीं है।
इस दौरान प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि बाहरी दबाव, धमकियां या किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से उत्तर कोरिया की परमाणु-सशस्त्र राष्ट्र के रूप में स्थापित स्थिति में कोई भी बदलाव नहीं लाया जा सकता। प्रवक्ता ने आगे कहा कि अमेरिका और उसकी सहयोगी सेनाओं द्वारा उत्तर कोरिया के खिलाफ बेबुनियाद बयानबाजी, निरंतर परमाणु खतरा पैदा करने के प्रयास और आक्रामक नीतियां हमारे देश की परमाणु हथियार संपन्न स्थिति को कभी भी प्रभावित नहीं कर सकतीं। परमाणु निरस्त्रीकरण अब एक अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त और अंतिम रूप दिया गया मुद्दा है।
'स्थिति को कभी नहीं बदल पाएंगे'
बयान में हाल ही में हुई दक्षिण कोरिया-अमेरिका और अमेरिका-जापान के उच्चस्तरीय वार्ताओं की कड़ी निंदा की गई है। इन वार्ताओं में प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम को पूर्ण रूप से समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया था। उत्तर कोरियाई प्रवक्ता ने अमेरिका-जापान के बीच हुई एक्सटेंडेड डिटरेंस संबंधी वार्ता की भी आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन और टोक्यो द्वारा उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता दोहराना व्यर्थ है। प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया कितनी भी बैठकें करें, कितनी भी बहस कर लें या संयुक्त बयान जारी कर लें, वे डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (DPRK) की परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में मौजूदा अपरिवर्तनीय स्थिति को कभी नहीं बदल पाएंगे।
बता दें कि यह कड़ा बयान गुरुवार को दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच हुई द्विपक्षीय परमाणु परामर्श समूह (Nuclear Consultative Group) की बैठक के ठीक बाद जारी किया गया। इस बैठक में दोनों देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण, सत्यापित और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण (CVID) के साझा लक्ष्य को एक बार फिर दोहराया था।
चीन के साथ संबंध
इसी बीच, उत्तर कोरिया और चीन ने दोनों देशों के बीच ‘मैत्री, सहयोग और पारस्परिक सहायता संधि’ के 65 वर्ष पूरे होने के अवसर पर द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत तथा गहरा करने की दृढ़ प्रतिबद्धता जताई है। चाइना डेली की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी दो दिवसीय उत्तर कोरिया यात्रा के दौरान प्योंगयांग के साथ आर्थिक सहयोग, बुनियादी ढांचागत विकास, सैन्य सहयोग और राजनयिक समन्वय को बढ़ाने पर जोर दिया।
शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के साथ हुई महत्वपूर्ण मुलाकात में दोनों देशों के बीच ‘नए युग’ के संबंध स्थापित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कितने भी बदलाव क्यों न आएं, चीन और उत्तर कोरिया के बीच पारंपरिक मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को अटूट बनाए रखा जाएगा।
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