चंडीगढ़
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने भी अपनी चुनावी तैयारी और तेज कर दी है। चुनाव से पहले भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की नई टीम फील्ड में उतरेगी जबकि सूबे के सीनियर भाजपा लीडर टीम की अगुवाई करेंगे। इसके अलावा सूबे में जल्द चुनावी कमेटियों का भी गठन किया जाएगा।
शुक्रवार देर शाम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन व राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने पंजाब के वरिष्ठ नेताओं अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़, विधायक अश्वनी शर्मा, संगठन मंत्री श्री मंथरि श्री निवासलु, महासचिव अनिल सरीन, केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया, मनप्रीत बादल, विजय सांपला, सोम प्रकाश समेत अन्य के साथ दिल्ली में बैठक की। बताया जा रहा है कि बैठक में अमित शाह भी मौजूद थे।
स्थानीय नेताओं से लिया फीडबैक
इस बैठक में भाजपा नेताओं से पंजाब के सियासी हालातों पर फीडबैक लिया गया जबकि उन्हें सूबे में चुनावी तैयारियों को तेज करने के भी निर्देश दिए गए। सूत्र बताते हैं कि भाजपा हाईकमान ने माझा, दोआबा व मालवा में पार्टी की वर्तमान स्थिति, भाजपा के कैडर, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ इत्यादि विषयों पर चर्चा की। पंजाब भाजपा के नेताओं ने हाल ही में हुए निकाय चुनाव और गत वर्ष हुए पंचायत चुनाव में पार्टी की स्थिति के बारे में भी हाईकमान को बताया।
चूंकि अब पंजाब को नए प्रदेशाध्यक्ष मिले हैं, इसलिए सभी जिलों में नई संगठनात्मक टीम भी तैयार करने पर बात हुई। वरिष्ठ नेताओं को निर्देशित किया गया कि वे अब फील्ड में पूरी तरह सक्रिय रहते हुए कार्यकर्ताओं में जोश भरें। चुनाव के मद्देनजर मेनिफेस्टो कमेटी के गठन पर भी विमर्श हुआ। चुनावी कमेटियों को जल्द गठित करने पर विचार हुआ ताकि वे जल्द अपना काम शुरू कर सकें।
नबीन का पंजाब दाैरा अहम
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 20 से 22 जून तीन दिन तक पंजाब में रहेंगे। वे यहां सूबे के व्यापारियों और कार्यकर्ताओं से मिलेंगे जबकि अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेकेंगे। बताया जा रहा है कि वे प्रमुख डेरों के प्रतिनिधियों से भी मिल सकते हैं।
नितिन नबीन के पंजाब दौरे के बड़े सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। उनके दौरे की अंतिम रूपरेखा अभी तय की जा रही है। वे दुर्ग्याणा मंदिर में दर्शन करने के साथ-साथ जलियांवाला बाग में शहीदों को श्रद्धांजलि देने भी जा सकते हैं। वे सूबे में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे।
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